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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण की फिर बिगड़ी तबीयत,मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया

भीम आर्मी के संस्थापक एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण को सहारनपुर की देवबंद जेल से इलाज के लिए मेरठ में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक युवा दलित नेता चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण पिछले कई दिनों से दांत में दर्द से जूझ रहे थे। देबबंद जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा का कहना है कि जेल के डॉक्टरों ने चंद्रशेखर आज़ाद को दवा दी थी, लेकिन आराम नहीं हुआ। तबीयत ज़्यादा बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने मंगलवार को चंद्रशेखर को कड़ी सुरक्षा के बीच मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग में भर्ती कराया।



दलित समाज के युवा हृदय सम्राट चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण एक बार फिर से बीमार हो गए हैं। इस बार वो दांत में दर्द से पीड़ित है। चंद्रशेखर को सहारनपुर की देवबंद जिला कारागार से मेरठ मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आया गया है। जहां दंत रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर रियाज अहमद ने चंद्रशेखर को दांतों की जांच इलाज के लिए एक एक्सरे करने की सलाह दी। लेकिन मेडिकल कॉलेज में दांत के छोटे एक्सरे की सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर शहर के दूसरे निजी अस्पताल (आनंद नर्सिंग होम) में चंद्रशेखर के दांतों का एक्सरे कराया गया। और फिर बाद में मेडिकल कॉलेज में दंत रोग विभाग में तैनात डॉक्टरों ने चंदशेखर के दांतों का रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) किया। दंत रोग विभाग के डॉक्टर मनु शर्मा का कहना है कि चंद्रशेखर के दांतों की नसों में कमजोरी होने की वजह से दर्द हो रहा था।

भीम आर्मी संस्थापक एडवोटेक चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण के मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने की सूचना मिलने के बाद उन्हें देखने के लिए उनके समर्थक काफी संख्या में मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। इस दौरान मीडिया के लोग भी वहां पहुंच गए। चंद्रशेखर आज़ाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस बार सिर्फ इलाज की बात करो, राजनीति की बातें फिर कभी करेंगे। बता दें कि चंद्रशेखर को पिछले साल नवंबर महीने में तबीयत बिगड़ने के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।



आपको ये भी बता दें कि सहारनपुर में पिछले साल मई महीने में हुई जातीय हिंसा के बाद एडवोटेक चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण नाम सुर्खियों में आया था। शब्बीरपुर में 5 मई को दलित समाज के लोगों के घर हुई आगजनी और हिंसा के खिलाफ भीम आर्मी ने चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में सहरानपुर में 9 मई 2017 को विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद सहारनपुर में कई जगह आगजनी की घटना हुई थी। सहारनपुर पुलिस ने इन सभी घटनाओं के लिए चंद्रशेखर आज़ाद को जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्य आरोपी बनाया था। यूपी एसटीएफ ने 8 जून 2017 को हिमाचल प्रदेश से चंद्रशेखर आज़ाद को गिरफ़्तार कर लिया था। तब से चंद्रशेखर आज़ाद सहारनपुर की देवबंद कारागार में कैद है। हालंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 नवंबर 2017 को चंद्रशेखर को सभी मामलों में जमानत दे दी थी, लेकिन सहारनपुर जिला प्रशासन ने चंद्रशेखर आज़ाद रावण की जेल से रिहाई होने से पहले ही उनपर रासुका के तहत कार्रवाई कर दी। इतना ही नहीं सहारनपुर जिला प्रशासन चंद्रशेखर पर लगी रासुका की अवधि को 2 बार बढ़ा चुका है। जिससे दलित समाज और भीम आर्मी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बेहद ख़फ़ा हैं।



चंद्रशेखर आज़ाद को जेल से रिहा कराने की मांग को लेकर प्रकाश राव अंबेडकर, गुजरात से निर्दलीय विधायक और युवा दलित नेता जिग्नेश मेवानी, भीम आर्मी के पदाधिकारियों, युवा शक्ति दल समेत दलित समाज के कई सामाजिक संगठनों की तरफ से देशभर में दिल्ली, सहारनपुर, मेरठ, गाज़ियाबाद, मुज़फ़्फ़रनगर, शामली में विरोध प्रदर्शन और रैलियां हो चुकी हैं।

मुख्य संवाददाता
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