img

सहारनपुर जेल से रिहा हुए भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण, मायावती को बताया बुआ

किसी ने ठीक ही कहा है…’बाधाएं कब बांध सकी हैं आगे बढ़ने वालों को, विपदाएं कब रोक सकी हैं मरकर जीने वालों को’ जी हां ये पंक्तियां भीम आर्मी के संस्थापक और अनुसूचित जाति के हृदय सम्राट एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण के जीवन संघर्ष पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को नहीं  चाहते हुए भी आखिरकार चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण को जेल से रिहा करना ही पड़ा। चाहे इसके पीछे राजनीतिक हित साधने की मंशा हो या फिर अनुसूचित जाति समाज को अपने पाले में लाने की मजबूरी। खैर जो भी हो अब अनुसूचित जाति समाज का युवा नेता और भीम आर्मी का मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण जेल की सलाखों से बाहर आ गया है।

गुरुवार को सूबे की योगी सरकार ने सहारनपुर में पिछले साल (मई 2017) में हुई जातीय हिंसा के मामले को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की कार्रवाई के तहत करीब 16 महीने से  जेल में सजा काट रहे चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण को रिहा करने का फैसला किया और तुरंत ही सहारनपुर के जिलाधिकारी को रिहाई के आदेश जारी किए थे, जिसके बाद सहारनपुर जिला प्रशासन उनकी रिहाई को लेकर असमंजस में पड़ गया, लेकिन चंद्रशेखर को रिहा करने के फैसले की ख़बर मिलते ही भीम आर्मी के हजारों कार्यकर्ता और समर्थक जेल के बाहर एकजुट हो गए, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन और जेल प्रशासन ने देर रात ही करीब पौने तीन बजे कड़ी सुरक्षा के बीच चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण के साथ सोनू पुत्र नथीराम और शिवकुमार पुत्र रामदास निवासी शब्बीरपुर को भी  को जेल से आज़ाद कर दिया।

यहां बता दें कि गुरुवार को प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने इस अहम फैसले की जानकारी देते हुए बताया था कि चंद्रशेखर की रिहाई का ये फैसला उनकी मां की तरफ से दिए गए प्रार्थना पत्र पर लिया गया  है। जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखर को तय तिथि से 48 दिन पहले रिहा किया गया है, जबकि जेल में रहने की अवधि 1 नवंबर 2018 तक थी, और नथीराम और शिवकुमार की जेल में रहने की अवधि 14 अक्टूबर 2018 तक थी।  



चंद्रशेखर आज़ाद की रिहाई को लेकर समर्थकों में खुशी की लहर...

सहारनपुर जिला जेल से चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण के बाहर निकलते ही उनके समर्थक खुशी से झूम उठे और वहां पूरा वातावरण जय भीम और चंद्रशेखर आज़ाद जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। जिसकी खुशी चंद्रशेखर के चेहरे पर भी साफ दिखाई दे रही थी। वो अपनों के बीच आकर उनका हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे थे। इसी बीच वहां मौजूद मीडिया के भारी जमावड़े ने उन्हें घेर लिया और उनसे प्रतिक्रिया लेनी चाही....उन्होंने इस मौके पर मीडिया को नाराज नहीं किया, बल्कि बेबाक अंदाज में उनके सवालों का जवाब दिया। इस दौरान चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण ने केंद्र और यूपी की बीजेपी सरकारों के खिलाफ खुलकर निशाना साधते हुए कहा कि अभी तो बीजेपी की सरकारों से संघर्ष की शुरुआत है। आगे इसे सीधे लड़ा जाएगा। उन्होंने अपने समर्थकों से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केंद्र की सत्ता से उखाड़ने का आह्वान किया।  चंद्रशेखर ने अपनी रिहाई पर बोलते हुए कहा कि यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश से डर गई थी, इसलिए मेरी रिहाई के आदेश जल्दी देकर वो खुद को बचा रही है। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि उस समय के जिलाधिकारी ने मुझे जातीय हिंसा के मामले में गलत तरीके से फंसाया था। चंद्रशेखर ने कहना है कि जेल में मेरे साथ ज्यादती हुई है. मुझे अपने समाज के लोगों से मिलने की इजात नहीं थी। उनका आगे ये भी कहा कि अब में अनुसूचित जाति समाज के हक के लिए संघर्ष करूंगा। चुनाव मैदान में उतरने के सवाल पर चंद्रशेखर ने कहा कि मेरा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन महागठबंधन हुआ तो मैं बीजेपी के खिलाफ प्रचार करूंगा।  इस बीच उन्होंने बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को अपनी बुआ के समान बताया।  


8 जून 2017 को हिमाचल प्रदेश से हुई थी गिरफ़्तारी...
आपको बता दें कि एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण को सहारनपुर में पिछले साल मई 2017 में शब्बीरपुर समेत कई जगहों पर हुई जातीय हिंसा के मामलों में यूपी पुलिस ने 8 जून 2017 को हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ़्तार किया गया था और मुख्य आरोपी बनाकर रासुका के तहत कार्रवाई की गई थी। जिसके बाद से ही भीम आर्मी और अनुसूचित जाति समाज से जुड़े तमाम संगठनों के लोग उन्हें जेल से रिहा करने की मांग कर रहे थे। जिसके लिए कई बार दिल्ली,यूपी, हरियाणा, पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में बड़े विरोध प्रदर्शन और आंदोलन चलाया गया था। इसके अलावा गुजरात के निर्दलीय विधायक और अनुसूचित जाति समाज के युवा नेता जिग्नेश मेवाणी भी चंद्रशेखर की रिहाई के लिए कई बड़ी रैलियों के जरिये आंदोलन कर चुके हैं। इसके साथ ही कांग्रेस और दिल्ली में सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी ने भी चंद्रशेखर के समर्थन में खड़ी थी। और पिछले दिनों आप के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने जेल में बंद चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण से मुलाकात करने की इजाजत मांगी थी, लेकिन यूपी सरकार ने उन्हें इजाजत नहीं दी थी।  



चंद्रशेखर की रिहाई के पीछे हैं कई कारण...

तय समय से 48 दिन पहले हुई चंद्रशेखर की रिहाई के योगी सरकार के फैसले के पीछे कई कारण और मायने निकाले जा रहे हैं। इसका एक कारण ये भी रहा कि चंद्रशेखर को जेल में रखने के मामले में  योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना था और दूसरा अगले चुनाव साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर अनुसूचित जाति समाज की नाराजगी को दूर करने के साथ-साथ उनके प्रति सहानुभूति  दिखाना भी है। अब आगे देखना होगा कि चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण अपने संगठन भीम आर्मी को किस दिशा की तरफ ले जाएंगे यो तो अभी देखना बाकी है।  

चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का परिचय...
यहां अब हम ये भी जान लेते हैं कि आखिर चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण कौन हैं...सहारनपुर के घडकोली निवासी चंद्रशेखर ने कानून का पढ़ाई करने के बाद समाज सेवा में कदम रखते हुए 2015 में भीमा आर्मी एकता मिशन की स्थापना की और उसके जरिये और सहारनपुर में ही कई शिक्षण संस्थाओं का संचालन हो रहा है। 

सतीश आज़ाद
सतीश आज़ाद
संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े