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असल ज़िन्दगी में टॉयलेट ने कराया तलाक

अक्षय कुमार की फ़िल्म टॉयलेट में जब पत्नी टॉयलेट ना होने के कारण तलाक मांगती है तो टॉयलेट बन जाता है और घर टूटने से बच जाता है लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा में एक घर में टॉयलेट नहीं बन पाता और सिर्फ़ टॉयलेट के कारण घर टूट जाता है। जी हां, ये फ़िल्म नहीं असल ज़िन्दगी की कहानी हैं, जब पति ने जब टॉयलेट बनाने से मना किया तो पत्नी ने हिम्मत दिखाते हुए तलाक ही दे डाला। भीलवाड़ा शहर में पति से नाराज इस पत्नी ने इसके लिए बकायदा न्यायालय में तलाक की अर्जी दी थी। जिसे सही मानते हुए न्यायालय ने भी इसे स्त्री की गरिमा का हनन मानते हुए तलाक मंजूर कर लिया है। वादमित्र अधिवक्ता राजेश शर्मा ने कहा कि शहरी क्षेत्र की इस महिला ने पति के खिलाफ तलाक याचिका पारिवारिक न्यायालय में 20 अक्टूबर 15 को पेश की।
महिला ने याचिका में बताया कि उसकी शादी 2011 में हुई थी। शादी के बाद उसे निजी। कमरा नहीं  दिया गया, और उसे बरामदे में सोना पड़ता है, घर में टॉयलेट भी नहीं हैं, जब मैैंने टॉयलेट बनाने के लिए कहा तो  सब मुझे  तंग करने लगे, पति टॉयलेट बनाकर नहीं दे रहा है। मजबूरन उसे खुले में शौच जाना पड़ रहा है। जिससे उसे बहुत शर्मिंदगी होती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शर्मा ने पति के टॉयलेट नहीं बनाकर देने को पत्नी के लिए मानसिक क्रूरता और त्रासदीपूर्ण स्थिति मानते हुए महिला के पक्ष में तलाक याचिका मंजूर कर ली।
न्यायाधीश ने कहा कि प्रार्थी ने विवाहित महिला होने के नाते यह मांग की थी कि उसके लिए घर में सोने-उठने-बैठने के लिए अलग कक्ष होना चाहिए। महिला की ऐसी मांग करना गैर वाजिब नहीं समझा जा सकता। साथ ही एक महिला होने के नाते महिला को यह अधिकार है कि उसकी निजता और स्त्रीयोचित गरिमा बनी रहे।
न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि परिवार की आवश्यकता और महिलाओं के मान-सम्मान के लिए शौचालय अपरिहार्य है। 21 वीं सदी के इस दौर में खुले में शौच की प्रथा समाज के लिए कलंक है। शराब, तंबाकू, और मोबाइल पर बेहिसाब खर्च करने वाले घरों में शौचालय का ना होना एक विडंबना है। 

मुख्य संवाददाता
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