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बागपत में अनुसूचित जाति के लोगों ने दी चेतावनी- ‘हमारी जमीन नहीं मिली तो कर लेंगे धर्म परिवर्तन’

यूपी के बागपत में चकबंदी के नाम पर हुई गड़बड़ी से आहत होकर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी दी है। मामला दाहा क्षेत्र के बामनौली गांव का है। यहां चौपाल पर हुई पंचायत में अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्हें आवंटित पट्टे मूल जोत की जमीन की जगह नहीं दिए हैं।

बागपत के बामनौली गांव में अनुसूचित जाति के वर्ग लोग इन दिनों बेहद गुस्से में हैं। इनके गुस्से की वजह इन्हें जमीन की चकबंदी में न्याय न मिलना है। ये लोग न्याय पाने के लिए लंबे समय से धरना-प्रदर्शन और पंचायत कर आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन पर इनके आंदोलन का कोई असर नहीं हो रहा है। इस मामले को लेकर गांव में अनूसचित जाति वर्ग के लोगों की एक अहम पंचायत हुई, जिसमें सभी ने एकजुट होकर अपनी-अपनी नाराजगी जाहिर की। पंचायत की अध्यक्षता करते हुए मास्टर राजपाल सिंह ने कहा कि सन 1976 में हमारे समाज के लोगों को गांव में राज्य सरकार की तरफ से पट्टे आवंटित किए गए थे, लेकिन चकबंदी के दौरान उनके पट्टे मूल जोत की जमीन की जगह नहीं दिए गए। उनकी जमीन की बेहद कम कीमत लगाई गई, जबकि जो जमीन उन्हें दी जा रही है वह ज्यादा कीमत लगाकर बेहद कम दी  जा रही है। पंचायत में मौजूद रहे लोगों का ये भी आरोप है कि दबंगों ने उनकी ज़्यादातर जमीन पर कब्जा कर रखा है। उनका कहना था कि हम चकबंदी विभाग के बड़े अफसरों से लेकर जिला प्रशासन के अन्य अफसरों से भी न्याय की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई, बल्कि धरना-प्रदर्शन करने को लेकर उल्टे हमारे खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया जाता है।  इस मामले में अफसरों की अनदेखी से परेशान होकर अनुसूचित जाति समाज के इन लोगों ने पंचायत में प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी समस्या का जल्द हल नहीं हुआ तो वो सभी एक साथ मिलकर धर्म परिवर्तन कर लेंगे। इस पंचायत के दौरान अनुसूचित जाति समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए और सभी ने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

बागपत के बामनौली गांव के इन अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों द्वारा दी गई धर्म परिवर्तन करने की इस चेतावनी को शासन-प्रशासन भले ही नज़र अंदाज कर रहा हो या हल्के में ले रहा हो, लेकिन ये मात्र चेतावनी भर नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। जो हमारी शासन व्यवस्था की कार्यशैली के साथ-साथ धार्मिक,सामाजिक व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा करता है। क्योंकि हमारे इस लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करने की आजादी और अधिकार दिए गए हैं। लेकिन हमें ये भी समझना होगा की आखिर वो अपना मूल धर्म क्यों त्यागने को मजबूर हो रहा है। 

मुख्य संवाददाता
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