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बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने दिया बड़ा बयान, कहा- “हम किसी भी चुनाव में किसी से भी गठबंधन के लिए तैयार, बशर्ते हमें सम्मानजनक सीटें मिलें”

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को अपने नए आवास 9 माल एवेन्यू में गृह प्रवेश के अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर यूपी में महागठबंधन पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। इस दौरान मायावती ने कहा कि केंद्र की सत्ता से बीजेपी को उखाड़ने के लिए हम महागठबंधन के खिलाफ नहीं, बल्कि पक्ष में हैं। लेकिन सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो हमारी पार्टी अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ेगी।  

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि हम देश के अन्य राज्यों के साथ ही यूपी में भी महागठबंधन के पक्ष में हैं, लेकिन दूसरे राजनीतिक दलों के साथ हमारा गठबंधन तभी होगा, जब हमें सम्मानजनक सीटें मिलेंगी, नहीं तो हम अकेले ही अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरने को पूरी तरह तैयार हैं, इसके लिए हमारी पार्टी की तैयारी भी है। मायावती ने भी कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को भले ही कोई सीट नहीं मिली हो, लेकिन हमारा का प्रदर्शन अन्य के दलों के मुकाबले बेहद अच्छा था। हमारा वोट प्रतिशत भी ज़्यादा था । इसके अलावा बीएसपी ने ही बीजेपी से डटकर मुकाबला किया था और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में हम बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने का पूरा प्रयास करेंगे। मायावती ने आगे कहा कि हमारे अलावा भी अन्य विपक्षी पार्टियां भी बीजेपी को राज्यों और केंद्र की सत्ता में आने से रोकने के लिए काम कर रही हैं।   

गठबंधन को लेकर दिए गए मायावती के इस बयान को बड़ा अहम माना जा रहा है और इससे सियासी हलचल भी बढ़ गई है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ इसे एसपी और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर दबाव बनाने वाला बयान बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि इस बयान से बीएसपी-एसपी गठबंधन खतरे में पड़ सकता है।  

वैसे वर्तमान दौर में एसपी-बीएसपी, कांग्रेस और आरएलडी समेत कई अन्य दल ख़ासकर यूपी में अपना वजूद बचाने के साथ-साथ सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष कर रही हैं, तो ऐसे में ये सभी विपक्षी पार्टियां मजबूरी में ही सही बीजेपी को यूपी और केंद्र की सत्ता से बाहर करने के लिए महागठबंधन बनाकर एकजुट होने की दिशा में फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए बीएसपी के साथ सीटों से समझौता करने का संकेत पहले ही दे चुके हैं। अखिलेश यादव ने पिछले दिनों अपने मैनपुरी दौरे के दौरान कहा था, ''ये लड़ाई लंबी है, मैं आज कहता हूं की बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन रहेगा और 2-4 सीटें आगे पीछे रहेंगी और त्याग भी करना पड़ेगा तो एसपी पीछे नहीं हटेगी''।  

यहां बता दें कि 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बीएसपी-एसपी और आरएलडी के मुखिया मायावती, अखिलेश यादव और अजीत सिंह व्यक्तिगत और राजनीतिक दुश्मनी भुलाने के साथ-साथ अहम तोड़कर यूपी में लोकसभा की 3 सीटों और विधानसभा के 1 सीट पर हुए उप चुनाव में करीब आए थे। जिसका परिणाम भी बेहद सुखद रहा था, क्योंकि एसपी ने बीएसपी से सांकेतिक समर्थन मिलने पर ही गोरखपुर, फूलपुर लोकसभा उपचुनाव और बिजनौर की नूरपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को मात देकर जीत का परचम लहराया था। इसी तरह शामली में कैराना लोकसभा उपचुनाव में आरएलडी प्रत्याशी ने बीएसपी-एसपी की मदद से बीजेपी को पटखनी देते हुए जीत हासिल की थी। जिससे उत्साहित होकर एसपी मुखिया अखिलेश यादव बीएसपी सुप्रीमो मायावती से लखनऊ स्थित आवास पर पहली बार मुलाकात करने गए थे, जिसके बाद से एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन होने की चर्चा पुरजोर तरीके से होने लगी थी। लेकिन अभी तक गठबंधन फाइनल मुकाम पर नहीं पहुंचा है, जिसका बीजेपी को बेहद इंतजार है, क्योंकि की विपक्ष के इस महागठबंधन के बाद ही बीजेपी अपनी अगली रणनीति तैयार करेगी। हालांकि बीजेपी अंदर खाने महागठबंधन पर ब्रेक लगाने के लिए इनके बीच दरार डालने की रणनीति पर भी काम कर रही है, जिसका असर शिवपाल यादव का एसपी से अलग होकर नया संगठन बनाने के रूप में दिख रहा है। इसके लिए एसपी मुखिया अखिलेश यादव कह भी चुके हैं कि उनके चाचा शिवपाल यादव को एसपी से अलग करने के पीछे बीजेपी का हाथ है। 

आपको यहां ये भी बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव- 2014 में एसपी,बीएसपी और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ी थी। जिससे बीएसपी को यूपी की 80 सीटों में से  1 भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन उसे 19.77 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस और एसपी महज परिवार तक ही सिमट कर रह गई थी। एसपी को 22.35 प्रतिशत वोट मिलने पर केवल 5 सीटें और कांग्रेस को 2 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। जबकि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ते हुए यूपी की 80 में से 73 सीटों पर जीत का परचम लहरा कर एसपी,बीएसपी,कांग्रेस, आरएलडी समेत पूरे विपक्ष को मात दी थी।  इसी तरह के नतीजे 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिले थे। जिसमें एसपी को 21.82 प्रतिशत वोट के साथ 47 सीटें ही मिली और यूपी की सत्ता से बाहर होना पड़ा। जबकि बीएसपी को 22.23 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे और उसे 19 सीटों पर ही जीत मिली थी। इसीलिए सत्ता से बेदखल होने का दंश झेल रही सभी पार्टियां अब महागठबंधन बनाने  की जुगत में लगी हैं।

मुख्य संवाददाता
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