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भीमा कोरेगांव हिंसा के लिए बीजेपी और संघ जिम्मेदार- मायावती

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने महाराष्ट्र में पुणे के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा पर गहरा दुख जताया है। मायावती ने इस हिंसा के लिए महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार और संघ को जिम्मेदार ठहराया है।


बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में पुणे के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा एक सोची समझी रणनीति के तहत हुई है।  उन्होंने कहा कि ये जो घटना घटी है ये रोकी जा सकती थी।  महाराष्ट्र सरकार को वहां सुरक्षा का उचित प्रबंध करना चाहिए था। वहां बीजेपी की सरकार है और उन्होंने वहां हिंसा कराई है। मायावती ने ये भी कहा कि इसके पीछे बीजेपी, संघ और जातिवादी ताकतों का हाथ है।  उन्होंने कहा कि बीएसपी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है।  

  
आपको बता दें कि 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने पर दलित समुदाय के लोग इस दिन को शौर्य दिवस के तौर पर मनाने के लिए विजय स्तम्भ की ओर बढ़ रहे थे, इसी दौरान भगवाधारियों ने शौर्य दिवस मनाने पहुंचे लोगों में पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई। मृतक की पहचान पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर सानसवाड़ी के रहने वाले राहुल पटांगले के रूप में हुई है। शिकारपुर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है। इस दौरान 40 गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि 10 वाहनों को भीड़ ने पुणे-अहमदाबाद हाइवे पर आग के हवाले कर दिया।

 
आइये आपको बता दें कि दलित समाज 1 जनवरी को शौर्य दिवस के रूप में क्यों मनाता है और बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर हर साल यहां पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने क्यों आते थे। दरअसल भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में लड़ गई थी, ये लड़ाई महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली  के 28 हजार की फौज को धूल चटा दी थी। जिसके बाद से पेशवा राज खत्म हो गया था, इस युद्ध को दलित समुदाय अपनी जीत के तौर पर देखता है, जबकि ब्राह्मणवादी लोग इसे अंग्रेजों की जीत के तौर पर पेश करने की कोशिश करते हैं और अपनी शर्मनाक हार के तौर पर स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। इतिहास के पन्ने किसी से छिपे नहीं हैं कि पेशवाई राज में किस तरह अछूतों पर जुल्म ढाए गए थे। 

मुख्य संवाददाता
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