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असम सरकार का ऐतिहासिक फैसला- बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं की तो कटेगी सैलरी

असम सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बुजुर्ग लोगों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पास किया है। जिसके मुताबिक अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेगा तो उसकी सैलरी का 10 प्रतिशत काटकर उसके पैरेंट्स के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अगर कर्मचारी का कोई भाई-बहन दिव्यांग है तो उसकी सैलरी से 5 प्रतिशत अतिरिक्त कटौती की जाएगी। असम देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने बुजुर्गों के हितों के लिए इस तरह का कानून बनाया है।

राज्य के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा- हमारी सरकार को ये मंजूर नहीं कि कोई भी शख्स अपने बुजुर्ग मां-बाप को ओल्ड एज होम में छोड़कर जाए। दिव्यांग भाई-बहनों के लिए भी हम यही चाहते हैं। शर्मा के मुताबिक- शुरुआत में इस कानून के दायरे में सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को रखा गया है। लेकिन जल्द ही प्राईवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। बता दें कि असम सरकार ने बजट सेशन में इस तरह का बिल लाने का वादा किया था। सरकार का कहना था कि असम के कई ओल्ड एज होम से इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं कि अच्छी नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों ने भी पैरेंट्स को छोड़ दिया। अब असम सरकार के कर्मचारियों को डीटेल में अपने पैरेंट्स और दिव्यांग भाई-बहनों की जानकारी भी विभाग को देनी होगी।

असम विधानसभा में शुक्रवार इस बिल पर चर्चा हुई। जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। फिलहाल विधेयक राज्यपाल को भेज दिया गया है, मंजूरी मिलने के बाद असम राज्य में यह कानून लागू हो जाएगा। इस कानून को असम कर्मचारी अभिभावक जवाबदेही एवं निगरानी विधेयक, 2017 के तहत लागू किया जाएगा।  

रजनी गुरूंग
रजनी गुरूंग
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