img

दिल्ली में सिखों की शादी के लिए जल्द लागू होगा 'आनंद मैरिज एक्ट'

दिल्ली सरकार ने सिखों की शादी का रजिस्ट्रेशन आनंद मैरिज एक्ट में करने की तैयारी पूरी कर ली है। केंद्र ने 7 जून 2012 में इसे बनाया था। अब सिर्फ कानून विभाग और एलजी की मुहर लगनी बाकी है। इस एक्ट में सिखों के आनंद कारज (शादी) का पंजीकरण करने वाला दिल्ली चौथा राज्य होगा। इससे पहले पंजाब, हरियाणा और झारखंड में यह लागू हो चुका है। हरियाणा सबसे पहला राज्य था जहां आनंद मैरिज एक्ट, 2012 को पास किया गया। इसके बाद पंजाब में बादल सरकार ने इसे पास किया और फिर झारखंड में पास हुआ।
    
आपको बता दें कि दिल्ली में अभी भी सिखों की शादी का पंजीकरण हिंदू मैरिज एक्ट 1955 में ही होता है। 2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली की 3.4 फीसदी आबादी सिख धर्म को मानती है। यानी दिल्ली की वर्तमान आबादी 1.75 करोड़ में से छह लाख सिख धर्म को मानती है। राजौरी गार्डन से विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा दिल्ली विधान सभा में कई बार आनद मैरिज एक्ट का मामला उठा चुके हैं। सिरसा ने बताया कि विदेशों में रहने वाले सिखों को सबसे ज्यादा परेशानियां होती हैं। धर्म को लेकर वहां उन्हें कई मुसीबतों को झेलना पड़ता है। सिर्फ इसलिए कि उनकी शादियां आनंद मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर नहीं होतीं। कुछ जगह आनंद मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट को लेकर भी कंफ्यूजन है।

सिरसा ने जानकारी दी कि राजस्व एवं कानून मंत्री कैलाश गहलोत के साथ आम आदमी पार्टी के सिख विधायकों की बैठक में जानकारी दी गई है कि दिल्ली में जल्द ही आनंद मैरिज एक्ट से रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि  नियम के अनुसार शुरु के तीन महीने तक रजिस्ट्रार बिना लेट फीस पंजीकरण करेंगे। तीन महीने से छह महीने के बीच जुर्माना लगेगा, जबकि छह महीने से एक साल की देरी होती है तो रजिस्ट्रार की अनुमति और एक साल से ज्यादा देरी की दशा में चीफ रजिस्ट्रार की अनुमति अनिवार्य होगी।

मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
मुख्य संवाददाता
PROFILE

' पड़ताल ' से जुड़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और सबस्क्राइब करें। हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

संबंधित खबरें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

0 Comments

मुख्य ख़बरें

मुख्य पड़ताल

विज्ञापन

संपादकीय

वीडियो

Subscribe Newsletter

फेसबुक पर हमसे से जुड़े