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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में शराब के विज्ञापनों पर लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शराब के विज्ञापनों को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट ने यूपी के सभी सिनेमा हॉल, समाचार पत्रों,पत्रिकाओं और टीवी चैनलों शराब के प्रचार विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि सीडी, म्यूजिक कैसेट और गोल्फ बॉल के विज्ञापन के जरिए परोक्ष रूप से भी शराब का विज्ञापन न किया जाए।  

स्ट्रगल अगेंस्ट पेन के अध्यक्ष मनोज मिश्र की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजित कुमार की पीठ ने शराब के विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि इस फैसले का कड़ाई से पालन किया जाए।    

हाईकोर्ट ने कहा कि कई शराब कंपनियां दूसरे उत्पादों के साथ अपने ब्रांड का विज्ञापन परोक्ष रूप से कर रही हैं। जबकि ऐसा करना शराब को बढ़ावा देना है। संविधान के अनुच्छेद 47 और आबकारी कानून की धारा 3 में दवा बनाने के सिवाय नशीले पदार्थों के प्रचार को प्रतिबंधित किया गया है। चूंकि इसके विज्ञापन से सरकार को काफी राजस्व मिलता है, इसलिए सरकार कानून का पालन नहीं कर रही है। इससे ये प्रतीत होता है कि सरकार परोक्ष रूप से शराब के विज्ञापन की अनुमति दे रही है, जो गलत है। कोर्ट ने आगे कहा कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सरकार, आबकारी आयुक्त और पुलिस अधिकारी कड़ी कार्रवाई करें। इसके अलावा हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो याचिकाकर्ता को 25 हजार रूपये हर्जाने का भुगतान भी करे।

मुख्य संवाददाता
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