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2जी स्पेक्ट्रम केस में फैसला- ए राजा और कनिमौझी समेत सभी आरोपी बरी

बहुचर्चित 1.76 लाख करोड़ रुपये के 2 जी स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाले के छह साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील आरोप साबित करने में नाकाम रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई आरोप साबित करने में नाकाम रही है। इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री  ए राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत 17 लोग आरोपी रहे। कोर्ट के फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील हरिहरन ने कहा कि सारा मामला धारणा पर आधारित था। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में कोई भी सबूत पेश नहीं किया जा सका। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी किया जाता है। 

फैसला आने के बाद कोर्ट के बाहर ए राजा और कनिमोझी के समर्थकों में जश्‍न का माहौल देखा गया, कनिमोझी के घर के बाहर भी समर्थकों को जश्‍न मनाते देखा गया. कोर्ट में इस फैसले से पहले लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी।

ये घोटाला यूपीए सरकार के दौरान हुआ था, सीबीआई के विशेष जज ओपी सैनी द्वारा 2जी घोटाले में सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाएंगे। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई छह साल पहले 2011 में शुरू हुई थी जब अदालत ने 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। जिन आरोपों में आरोप तय किए गए हैं उनमें छह महीने से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि खराब नीयत से आरोप लगाए गए थे और ये सारे आरोप राजनीतिक प्रोपेगेंडा था। वहीं, सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि 2जी पर फैसले को कांग्रेस सम्मान के तमगे की भांति ले रही है, लेकिन उसकी शून्य राजस्व घाटे का सिद्धांत तभी गलत साबित हो गया था जब उच्चतम न्यायालय ने स्पेक्ट्रम आबंटन रद्द कर दिया था।

कपिल सिब्बल ने कहा कि मेरी जीरो लॉस वाली बात सही साबित हुई। हम बेबुनियाद बातें नहीं करते। तब विपक्ष ने देश को गलत जानकारी दी। काफी हंगामा किया। विपक्ष और विनोद राय (आरोप लगाने वाले पूर्व CAG) को देश से माफी मांगनी चाहिए। "कोई करप्शन नहीं, कोई लॉस नहीं। अगर स्कैम है तो झूठ का स्कैम है। " पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है कि हमारी सरकार पर जो घोटाले के आरोप लगाए गए थे वो झूठे थे।

क्या था पूरा मामला :-
- कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर अनियमितता हुई थी, जिसका 2010 में कैग की रिपोर्ट के बाद व्यापक स्तर पर खुलासा हुआ। अगस्त 2007 में दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा यूएएस लाइसेंस के साथ 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई, 1 अक्टूबर, 2007 आवेदन की डेडलाइन तय की गई।

- 22 नवंबर, 2007 को वित्त मंत्रालय लाइसेंस आवंटन मामले में अपनाई जा रही प्रक्रिया पर चिंता जाहिर करते हुए डीओटी को लिखता है।

- 10 जनवरी , 2008 को डीओटी ने पहले आओ पहले पाओ के आधार (एफसीएफएस) पर लाइसेंस जारी करने का निर्णय लिया, जिसके बाद कट-ऑफ की तारीख 25 सितंबर कर दी गई। बाद में इसी दिन, डीओटी ने कहा कि 3.30 से 4.30 के बीच आवेदन करने वालों को लाइसेंस जारी किया जाएगा।

- 4 मई, 2009 को एनजीओ टेलीकॉम वॉचडॉग ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को लूप टेलीकॉम के लिए 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं को लेकर शिकायत की।

- 2009 में सीवीसी ने सीबीआई को इस मामले की जांच के लिए निर्देश दिए. सीबीआई दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी करता है. सीबीआई ने लॉबीस्ट नीरा राडिया के बारे में जानकारी और 2 जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए मध्यस्थों से संबंधित रिकॉर्ड के लिए आयकर महानिदेशालय से मदद मांगी।

- 20 नवंबर, 2009 को आईटी विभाग द्वारा दी गई जानकारी में दूरसंचार विभाग की नीतियों को गैरकानूनी तरीके से प्रभावित करने में कॉर्पोरेट खिलाड़ियों की भूमिका का पता चलता है. सामने आता है कि राडिया सीधे राजा के संपर्क में थे।

- 31 मार्च , 2010 को कैग की रिपोर्ट में लिखा जाता है, "लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का अभाव रहा". 10 नवंबर, 2010 को कैग 2 जी स्पेक्ट्रम पर सरकार को रिपोर्ट सौंपता है, जिसमें घोटाले के कारण सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये के घाटे की जानकारी दी जाती है।

- 2010 को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 2जी लाइसेंस आवंटन में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया. ए राजा ने इस्तीफा दिया।

- सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा कि डीबी ग्रुप की ओर से 200 करोड़ रुपये कलैगनार टीवी को स्थानांतरित किए गए, जो स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए रिश्वत थी।

- 2 फरवरी 2011 को 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
   

मुख्य संवाददाता
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